
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से वैश्विक राजनीति का सेंटर स्टेज हथिया लिया है। इस बार मुद्दा है यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने का, वो भी तब जब रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म हो जाए।
War के बाद Peace Talks – ट्रंप की नई नीति का इशारा?
ट्रंप ने सोमवार को कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका, यूरोप के साथ मिलकर यूक्रेन को सुरक्षा देने में मदद करेगा।
उनके शब्दों में:
“Security guarantees यूरोपीय देश देंगे, लेकिन अमेरिका के सहयोग से।”
यानि शांति के बाद अमेरिका सिर्फ तालियाँ नहीं बजाएगा, गारंटी लेटर भी साइन कर सकता है।
सुरक्षा गारंटी कैसी होगी? Article 5 जैसा या सिर्फ कागज़ी वादा?
CNN से बात करते हुए ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ ने दावा किया कि रूस इस बात पर सहमत हुआ है कि यूक्रेन को दी जाने वाली सुरक्षा गारंटी, NATO के Article 5 के समान होंगी।
याद दिला दें: NATO का Article 5 कहता है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो सभी सदस्य देश उस पर प्रतिक्रिया देंगे।
मतलब – एक पर हमला, सब पर हमला।
हालांकि ट्रंप ने साफ़ कहा कि इस मुद्दे पर सोमवार की बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई।
Zelenskyy की पुष्टि – 10 दिन में मिल सकती है फुल फॉर्मल डील
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन को दी जाने वाली सुरक्षा गारंटी अगले 10 दिनों में औपचारिक रूप से तय हो जाएगी।
इस प्रस्तावित गारंटी में 90 अरब डॉलर के अमेरिकी हथियारों की खरीद भी शामिल होगी। यानी:
“गारंटी के साथ गनटी भी!”
अमेरिका अब तक क्यों था खामोश?
अब तक अमेरिका ऐसी किसी सीधी सुरक्षा गारंटी से बचता आया था, क्योंकि इससे वो प्रत्यक्ष रूप से युद्ध में घसीटा जा सकता था।
लेकिन ट्रंप के बयान से लगता है कि पोस्ट-वार एरा में अमेरिका एक “Global guarantor” की भूमिका निभा सकता है।
डिप्लोमेसी या डीलमेसी? – सटायर वाला स्पिन
कुछ आलोचकों का कहना है कि ट्रंप के इस बयान में राष्ट्रहित कम, राजनीति ज़्यादा है। शायद 2024 के राष्ट्रपति चुनावों को ध्यान में रखकर वे एक बार फिर “डीलमेकिंग डोनाल्ड” वाली इमेज गढ़ रहे हैं।
“Make Ukraine Secure Again” – ट्रंप का नया कैंपेन स्लोगन हो सकता है?
सुरक्षा की गारंटी या अगली जंग की भूमिका?
ट्रंप के बयान ने एक बार फिर से वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
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क्या रूस वाकई इस गारंटी को स्वीकारेगा?
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क्या अमेरिका यूक्रेन को सुरक्षा देने की दिशा में कदम बढ़ाएगा या सिर्फ बयानबाज़ी होगी?
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और क्या ये “गारंटी” आने वाले चुनावों का गारंटीड वोट बैंक भी बनेगी?
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